नई दिल्ली। उत्तराखंड की बेटी और अधिवक्ता विदुषी निशंक को शिक्षा, न्याय, साहित्य एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रथम ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह संस्कृति युवा संस्था एवं इंडियन ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (PMML) ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया।
समारोह में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने विदुषी निशंक को ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ प्रदान कर सम्मानित किया।
पेशे से अधिवक्ता विदुषी निशंक भारत के प्रथम ‘लेखक गाँव’ (Writers’ Village) की निदेशक हैं। वे लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहकर शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।
अपनी स्वर्गीय माता की स्मृति में स्थापित ‘कुसुम कांता फाउंडेशन’ के माध्यम से वे शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा से जुड़े विभिन्न कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं।
शैक्षणिक क्षेत्र में भी विदुषी निशंक की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। वे विधि में स्वर्ण पदक विजेता हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से एलएलएम की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा वे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के लिए कॉमनवेल्थ स्कॉलर भी रही हैं।
शिक्षा, विधि और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भागीदारी को महिला सशक्तिकरण एवं युवा नेतृत्व के प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। उनके कार्यों ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
समारोह में विदुषी निशंक के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रसिद्ध हस्ती श्रीमती शोवना नारायण, भारतीय फिल्म एवं मीडिया जगत से श्री संदीप मारवाह, लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिन्हा, स्वामी प्रेम अन्वेष जी महाराज, श्रीमती स्वाति गर्ग सहित देशभर के विभिन्न क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों को भी ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।
पहली बार आयोजित ‘दिल्ली गौरव सम्मान’ का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं और विभूतियों को सम्मानित कर उनके कार्यों को पहचान देना है।
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