विशेष रिपोर्ट
देहरादून:
*LPG के बढ़ते दामों की काट बना 'पेलेट स्टोव', कमर्शियल रसोई में 50% तक घटी लागत*
नई दिल्ली:फूड सर्विस इंडस्ट्री में इन दिनों एक नई मूक क्रांति चल रही है। लगातार उतार-चढ़ाव भरे और महंगे होते कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दामों ने रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया था। ऐसे में मुनाफे को बचाए रखने के लिए फूड इंडस्ट्री अब पारंपरिक गैस बर्नर को छोड़कर इको-फ्रेंडली और किफायती बायोमास पेलेट बर्नर और स्टोव को अपना रही है।
गैस सिलेंडर बनाम पेलेट स्टोव:
गणित समझें होटल एसोसिएशन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, जहाँ एक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें सीधे तौर पर रेस्टोरेंट की थाली (Menu Price) को प्रभावित करती हैं, वहीं बायोमास पेलेट इसके मुकाबले आधे से भी कम दाम पर उपलब्ध हैं।
ईंधन की लागत: लकड़ी के बुरादे, कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से तैयार होने वाले 'पेलेट्स' (Pellets) बेहद सस्ते होते हैं।
सीधी बचत: जहाँ एलपीजी पर रोजाना हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं पेलेट स्टोव का इस्तेमाल करने वाले कैटरर्स और होटल मालिकों का दावा है कि उनकी ईंधन लागत में सीधे 50% तक की कमी आई है।
हाई हीटिंग क्षमता:
ये आधुनिक बर्नर हाई फ्लेम (तेज आंच) पैदा करते हैं, जिससे बड़े बर्तनों में खाना एलपीजी की तरह ही तेजी से या उससे भी जल्दी पक जाता है।आधुनिक तकनीक और नियंत्रित आंचपुराने जमाने के पारंपरिक चूल्हों के विपरीत, आधुनिक कमर्शियल बायोमास स्टोव ऑटो-फीडर और डिजिटल कंट्रोलर पैनल के साथ आते हैं। इनमें एक हॉपर (Hopper) लगा होता है जिसमें पेलेट्स भर दिए जाते हैं, और एक छोटी मोटर की मदद से आवश्यकतानुसार पेलेट्स बर्नर के अंदर जाते रहते हैं। इससे आंच को कम या ज्यादा करना बेहद आसान हो जाता है और धुआं भी नहीं के बराबर निकलता है।पर्यावरण के अनुकूल 'गो-ग्रीन' पहलबचत के अलावा, यह बदलाव पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ी फूड चेन कंपनियां अपने बेस किचन्स में पेलेट बर्नर्स को इंस्टॉल कर रही हैं。
*बाजार का रुख:*
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि एलपीजी की कीमतों में इसी तरह अस्थिरता बनी रही, तो क्लाउड किचन, मिठाई की दुकानों (Sweet Shops), कॉलेज हॉस्टल और बड़े होटलों में पेलेट स्टोव पूरी तरह से एलपीजी का स्थान ले लेंगे।
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