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स्थानीय व्यंजनों के बहाने संस्कृति का संदेश

देहरादून। गर्मी के मौसम में ठंडे-मीठे फलों और पहाड़ी व्यंजनों का अनोखा संगम उस वक्त देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास पर ‘पहाड़ी दावत’ का आयोजन किया।

तरबूज, खरबूजा और ककड़ी की ताजगी के साथ मंडवे की रोटी, लाल चावल, भट्ट की चूड़कानी और जौनसार की खास टमाटर चटनी ने मेहमानों को पहाड़ के असली स्वाद से रूबरू कराया। बुरांश और नींबू के शरबत ने इस देसी मेन्यू में और रंग भर दिया।


कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े सैकड़ों लोग पहुंचे। हालात ऐसे रहे कि हरदा के आवास पर जगह तक कम पड़ गई।

खास बात यह रही कि खुद हरीश रावत ने मेजबान बनकर मेहमानों को अपने हाथों से व्यंजन परोसे, जिससे आयोजन में अपनापन साफ झलकता रहा।


इस मौके पर हरीश रावत ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने की एक छोटी कोशिश है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने राज्य की परंपराओं, परिधानों और व्यंजनों को पहचान दिलाने के लिए काम किया और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड के व्यंजन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं और आने वाले समय में इन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अवदेश पंत, सत्यप्रकाश चौहान और प्रेम सिंह दानू ने चरखा भेंट कर उनका स्वागत किया।


‘पहाड़ी दावत’ के इस आयोजन ने न सिर्फ स्वाद का आनंद दिया, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की महत्ता का भी मजबूत संदेश दिया

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