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मनु भाकर ने कोच जसपाल राणा के निधन पर जताया गहरा शोक, कहा- "उन्होंने मुझे कभी हार न मानना सिखाया"

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता Manu Bhaker ने अपने कोच Jaspal Rana के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने राणा को अपना मार्गदर्शक, गुरु और ऐसा मित्र बताया, जिन्होंने उनके खेल जीवन और व्यक्तिगत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया गया कि मई के अंतिम सप्ताह में सीने में दर्द की शिकायत के बाद उनका स्टेंट लगाया गया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

देहरादून में जसपाल राणा के पार्थिव शरीर के पहुंचने के बाद मनु भाकर ने कहा कि वह अब भी इस दुखद खबर पर विश्वास नहीं कर पा रही हैं।

मनु ने कहा, "मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। यह खबर अविश्वसनीय है और मैं इसे स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूं। वह केवल मेरे कोच, मेंटर या गाइड नहीं थे, बल्कि एक ऐसे दोस्त थे जो मुझे अधिकांश लोगों से बेहतर समझते थे।"

जसपाल राणा ने अपने करियर में राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में कई पदक जीते थे, जिनमें 13 स्वर्ण पदक शामिल हैं। विश्व जूनियर चैंपियन, ओलंपियन और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित राणा ने बाद में कोचिंग की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

मनु भाकर के करियर में भी जसपाल राणा का योगदान बेहद अहम रहा। उन्होंने कठिन दौर में मनु का मार्गदर्शन किया और उन्हें फिर से आत्मविश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मनु ने याद करते हुए कहा, "कभी वह सख्त होते थे और कभी सिर्फ मेरी बातें सुनते थे। वह हमेशा मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ चाहते थे, भले ही उस समय मैं उनकी बातों को पूरी तरह समझ न पाती थी। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो महसूस होता है कि उनकी हर सीख का एक उद्देश्य था।"

उन्होंने आगे कहा, "जब हमने दोबारा साथ काम करना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे मैं घर लौट आई हूं। उन्हें पता होता था कि मैं कब आत्मविश्वास से भरी हूं, कब घबराई हुई हूं और कब मुझे सहारे की जरूरत है। वह हमेशा मुझसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने का तरीका ढूंढ़ लेते थे।"

जसपाल राणा के मार्गदर्शन में मनु भाकर ने अपने खेल में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास हासिल किया। इसके बाद उन्होंने Paris 2024 Olympic Games में दो पदक जीतकर इतिहास रचा और स्वतंत्र भारत की पहली खिलाड़ी बनीं जिन्होंने एक ही ओलंपिक में दो पदक अपने नाम किए।

मनु ने कहा, "हर पदक, हर सफलता और पोडियम पर बिताया गया हर पल मुझे उनकी याद दिलाएगा। उन जीतों में उनका भी हिस्सा है, क्योंकि उन्होंने मेरे करियर के सबसे कठिन दौर में भी मुझ पर विश्वास करना नहीं छोड़ा।"

उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझे संघर्ष करना, विनम्र बने रहना और कभी हार न मानना सिखाया। उनकी दी हुई सीख हमेशा मेरे साथ रहेगी।"

मनु भाकर ने अंत में कहा कि जसपाल राणा की सबसे बड़ी सीख अनुशासन और समर्पण थी, जिसे उन्होंने हर दिन अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

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