Mahendra Bhatt ने कांग्रेस पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने और सदन में किए गए “पाप” पर पर्दा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि महिला अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख देश देख चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि Rahul Gandhi के नेतृत्व में विपक्ष ने संसद में महिला आरक्षण का विरोध किया और बाद में उस पर जश्न मनाया, जिससे जनता में नाराजगी है।
उन्होंने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को धरना देने के बजाय अपने शीर्ष नेतृत्व को समझाना चाहिए था। उनके अनुसार, महिला आरक्षण कानून संसद के विशेष सत्र में लागू प्रक्रिया के तहत लाया गया था, जिसमें 2029 से आरक्षण लागू करने की व्यवस्था है।
भट्ट ने कहा कि कांग्रेस अब “आरक्षण में आरक्षण” की मांग कर रही है, जो असंवैधानिक है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत पहले जनगणना और फिर परिसीमन जरूरी है, जो 2029 से पहले संभव नहीं है। इस संदर्भ में उन्होंने Nari Shakti Vandan Adhiniyam का उल्लेख करते हुए कहा कि आवश्यक संशोधनों को विपक्ष ने समर्थन नहीं दिया।
उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो नेता आज मीडिया में बयान दे रहे हैं, उनका व्यवहार संसद में इसके विपरीत था। भट्ट ने यह भी कहा कि विपक्ष की महिला सांसदों ने भी इस मुद्दे पर साथ नहीं दिया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का इतिहास महिला अधिकारों के मामले में कमजोर रहा है। उन्होंने Manmohan Singh की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी इस विषय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
महिला अपराधों के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए भट्ट ने कहा कि वर्तमान सरकार हर मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों में अपराध दर्ज करने तक में लापरवाही होती है।
अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता, विशेषकर महिलाएं, कांग्रेस की नीतियों को समझ चुकी हैं और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देंगी।
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