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PM Vishwakarma Yojana: तीन साल में पूरा हुआ 30 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को शुरू हुए तीन साल पूरे हो गए हैं। 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई इस केंद्रीय योजना के तहत सरकार ने 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता देकर उनके काम को मजबूत करना है।

सरकार के मुताबिक, योजना के तहत कारीगरों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, आधुनिक उपकरणों और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी सहायता दी जा रही है।

18 पारंपरिक ट्रेड को योजना में शामिल किया गया

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के दायरे में 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं। इनमें पारंपरिक कौशल से जुड़े कारीगर और शिल्पकार आते हैं। योजना का मकसद उनके उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता के साथ बाजार तक पहुंच को बेहतर करना है।

ट्रेनिंग के साथ मिलता है स्टाइपेंड

योजना के तहत लाभार्थियों को बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है। बेसिक ट्रेनिंग की अवधि 5 से 7 दिन है, जबकि एडवांस ट्रेनिंग 15 दिन या उससे अधिक की हो सकती है।

ट्रेनिंग के दौरान लाभार्थियों को 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपेंड भी दिया जाता है। प्रशिक्षण में आधुनिक उपकरणों, बेहतर कार्य पद्धतियों, डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी शामिल की जाती है।

टूलकिट और लोन की भी सुविधा

योजना में कारीगरों के लिए टूलकिट इंसेंटिव और क्रेडिट सपोर्ट का प्रावधान है। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादों की मार्केटिंग में भी सहायता दी जाती है।

कारीगरों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए GeM, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मिलता है PM Vishwakarma Certificate और ID Card

पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को PM Vishwakarma Certificate और ID Card दिया जाता है। इसका उद्देश्य योजना के तहत कारीगरों की पहचान को औपचारिक रूप देना और उन्हें उपलब्ध सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाना है।

13 हजार करोड़ रुपये का है योजना का प्रावधान

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लिए वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक 13,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल, आधुनिक तकनीक और आर्थिक अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

किन लोगों को मिल सकता है फायदा?

यह योजना पारंपरिक कौशल से जुड़े पात्र कारीगरों और शिल्पकारों के लिए है। लाभ पात्रता, पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के आधार पर दिया जाता है।

आवेदन करने से पहले पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी आधिकारिक नियमों के अनुसार जांचना जरूरी है।

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