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PM Vishwakarma Yojana: कारीगरों के लिए बड़ी खबर

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। यह योजना 17 सितंबर 2026 को अपने तीन साल पूरे करने जा रही है। योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास, प्रशिक्षण और उद्यमिता से जुड़ी सहायता पर जोर दिया जा रहा है।

हाल ही में पंजाब के संगरूर में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में उद्यम पंजीकरण के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और ऑनलाइन बिक्री जैसे विषयों की जानकारी भी दी गई।

कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर

सरकार अब पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। कारीगरों को डिजिटल माध्यमों, ई-कॉमर्स और आधुनिक कारोबारी तरीकों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

ऑनलाइन बिक्री और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़कर कारीगर अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर देश के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंचा सकते हैं।

किन लोगों को मिल सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। योजना के तहत पारंपरिक कौशल से जुड़े विभिन्न पेशों को शामिल किया गया है।

योजना के माध्यम से कारीगरों को अपने हुनर को बेहतर बनाने, आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल सीखने और अपने काम को कारोबार के रूप में आगे बढ़ाने के अवसर मिलते हैं।

प्रशिक्षण के साथ कारोबार बढ़ाने पर फोकस

योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य कारीगरों को प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए सक्षम बनाना है। कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ कारीगरों को बाजार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

17 सितंबर को योजना के तीन साल होंगे पूरे

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी। 17 सितंबर 2026 को योजना के तीन साल पूरे होंगे। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से कारीगरों तक योजना की पहुंच बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कौशल से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, उनके कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। इससे पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

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