नई दिल्ली। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0’ संचालित कर रही है। यह योजना पोषण सहायता के साथ-साथ बच्चों की शुरुआती शिक्षा और विकास पर भी ध्यान देती है।
पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी सेवाओं को एकीकृत रूप में उपलब्ध कराया जाता है। योजना में 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण संबंधी सहायता दी जाती है। इसके अलावा आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर राज्यों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को भी योजना के तहत लक्षित किया गया है।
सरकार के अनुसार आंगनवाड़ी सेवाओं के तहत लाभार्थियों को छह प्रमुख सेवाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें पूरक पोषण, प्री-स्कूल गैर-औपचारिक शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएं शामिल हैं। टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं।
योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए शुरुआती वर्षों में बेहतर वातावरण तैयार करना भी है।
पोषण 2.0 में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। वहीं 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए शुरुआती विकास और देखभाल पर जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना और उनके समग्र विकास को बढ़ावा देना है।
सरकार सक्षम आंगनवाड़ी के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से मजबूत और उन्नत करने का प्रावधान है। इनमें एलईडी स्क्रीन, आरओ मशीन, स्मार्ट लर्निंग और ऑडियो-विजुअल सुविधाओं जैसी व्यवस्थाएं शामिल की जा सकती हैं।
योजना के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के आसपास पोषण वाटिका विकसित करने पर भी जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर फल, सब्जियां और अन्य उपयोगी पौधे उगाकर बच्चों और महिलाओं के लिए पोषण एवं आहार की विविधता बढ़ाना है।
सरकार ने पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) को भी योजना के तहत लागू किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पोषण सेवाओं की निगरानी, बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और कम वजन की पहचान तथा लाभार्थियों तक सेवाओं की अंतिम चरण तक पहुंच की निगरानी में मदद करता है। पोषण ट्रैकर 24 भाषाओं में उपलब्ध है।
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र लाभार्थी को अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर पंजीकरण कराना होता है। आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार योजना पात्र लाभार्थियों के लिए मांग के आधार पर उपलब्ध है। बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है; दिशानिर्देशों में मां के आधार के माध्यम से भी लाभ लेने का प्रावधान बताया गया है।
नोट: योजना के तहत उपलब्ध सेवाएं और पात्रता की स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के कार्यान्वयन नियमों के अनुसार हो सकती है। लाभ लेने के लिए नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र से जानकारी लेना उचित है।
0 Comments