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सावन सोमवार पर जानिए भगवान शिव के 5 रहस्यमयी मंदिर

भारत के इन शिव मंदिरों से जुड़ी हैं अनोखी धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं, सावन में दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु

नई दिल्ली। सावन के पावन महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। सावन के सोमवार को श्रद्धालु शिवालयों में पहुंचकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। देशभर में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी अनोखी भौगोलिक परिस्थितियों, परंपराओं और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष रूप से चर्चित हैं।

ऐसे ही पांच शिव मंदिरों की कहानी बेहद दिलचस्प है। कहीं ज्वार-भाटा के कारण मंदिर कुछ समय के लिए समुद्र में डूब जाता है, तो कहीं शिवलिंग के रंग बदलने की मान्यता है। आइए जानते हैं इन पांच प्रमुख शिव धामों के बारे में।

1. स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर

गुजरात के कैंबे तट के पास अरब सागर में स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी स्थिति के लिए जाना जाता है। ज्वार आने पर समुद्र का पानी मंदिर और शिवलिंग को ढक लेता है, जिसके कारण कुछ समय के लिए मंदिर दिखाई नहीं देता। ज्वार उतरने के बाद यह फिर से नजर आने लगता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, राक्षस तारकासुर के वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर से जुड़ी इस पौराणिक कथा और समुद्र में इसके जलमग्न होने की प्रक्रिया के कारण श्रद्धालुओं में इसके प्रति विशेष आस्था है।

2. निष्कलंक महादेव मंदिर

गुजरात के भावनगर जिले में कोलियाक तट से समुद्र के भीतर स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी बेहद अनोखा माना जाता है। ज्वार के दौरान मंदिर पानी में डूब जाता है और केवल ध्वज दिखाई देने की बात कही जाती है। समुद्र का पानी उतरने पर श्रद्धालु पैदल मंदिर तक पहुंचते हैं।

मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति के लिए यहां तपस्या की थी। धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण की सलाह पर उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसके बाद यह स्थान निष्कलंक महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

3. अचलेश्वर महादेव मंदिर

राजस्थान के धौलपुर में चंबल के बीहड़ क्षेत्र में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी विशेष मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के शिवलिंग के बारे में स्थानीय धार्मिक मान्यता है कि इसका रंग दिन में अलग-अलग समय पर बदलता है।

कहा जाता है कि सुबह शिवलिंग लाल, दोपहर में केसरिया और शाम के समय काला दिखाई देता है। इसके अलावा शिवलिंग की गहराई को लेकर भी कई मान्यताएं प्रचलित हैं।

4. लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर

लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी मान्यता भगवान राम और लक्ष्मण से संबंधित है। कहा जाता है कि खर-दूषण के वध के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण के आग्रह पर यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।

मंदिर में मौजूद शिवलिंग को ‘लक्ष्यलिंग’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसमें हजारों छोटे-छोटे छिद्र हैं। इनमें से एक छिद्र को पातालगामी माना जाता है, जिसमें चढ़ाया गया जल समा जाता है। वहीं एक अन्य छिद्र में पानी हमेशा मौजूद रहने की मान्यता है, जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है।

5. बिजली महादेव मंदिर

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर अपने नाम और इससे जुड़ी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर व्यास और पार्वती नदियों के संगम क्षेत्र के पास स्थित है।

मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुछ समय बाद शिवलिंग फिर अपने मूल स्वरूप में आ जाता है।

आस्था और रहस्य का अनोखा संगम

इन पांचों शिव मंदिरों से जुड़ी कहानियां और धार्मिक मान्यताएं इन्हें अन्य शिवालयों से अलग पहचान देती हैं। समुद्र में मंदिर का जलमग्न होना, शिवलिंग के रंग बदलने की मान्यता और बिजली गिरने से जुड़ी परंपरा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

सावन के दौरान इन मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि, मंदिरों से जुड़े चमत्कारों और पौराणिक कथाओं को धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

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