थानो (देहरादून), । उत्तराखंड के थानो स्थित लेखक गाँव में अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव-2026 का शुभारंभ राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया। महोत्सव में 60 देशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, कवियों, शिक्षाविदों, कलाकारों, चिंतकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
महोत्सव के उद्घाटन समारोह में साहित्य की सामाजिक भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन और विश्वबंधुत्व की भावना को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लेखक गाँव की परिकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार करने की दिशा में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का प्रयास सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि साहित्यकारों की लेखनी समाज में संवेदनशीलता जागृत करने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ें।
उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में लेखक गाँव शांति, संस्कृति और मानवीय सद्भाव का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी जैसी उत्तराखंड की लोकभाषाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उचित स्थान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति और भाषाई विरासत को व्यापक पहचान दिलाने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने लेखक गाँव को साहित्य, संस्कृति और कला का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि यह युवाओं को रचनात्मक कार्यों के लिए बेहतर मंच प्रदान कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजन विभिन्न देशों के साहित्यकारों और संस्कृतियों के बीच संवाद, सहयोग और मैत्री को बढ़ावा देंगे।
रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिपति संतोष चौबे ने लेखक गाँव को ज्ञान और सृजन का ऐसा केंद्र बताया, जो भारतीय साहित्य को नई पहचान दिलाने में योगदान दे सकता है।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और पहचान को सुरक्षित रखने के लिए ज्ञान, साहित्य और लेखकों का संरक्षण आवश्यक है।
महोत्सव के अध्यक्षीय संबोधन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अतिथियों और देश-विदेश से आए प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि लेखक गाँव केवल एक परिसर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्यिक सृजन और सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने का संकल्प है। हिमालय की भूमि सदियों से ऋषियों, मनीषियों और साधकों की तपस्थली रही है। लेखक गाँव इसी गौरवशाली परंपरा को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाने का प्रयास है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन, विभिन्न देशों के रचनाकारों के बीच संवाद और भारतीय साहित्य की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई प्रदान करेगा।
लेखक गाँव की निदेशिका विदुषी निशंक ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और कला के माध्यम से रचनात्मक संवाद को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रभावी अवसर उपलब्ध कराना है।
महोत्सव का शुभारंभ साहित्य को सामाजिक चेतना, संस्कृति को राष्ट्रीय अस्मिता और ज्ञान को मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनाने के संकल्प के साथ हुआ। देश-विदेश के साहित्यकारों की सहभागिता से उत्तराखंड का लेखक गाँव भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है।
0 Comments