देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि SIR से जुड़े अंतिम निर्णय चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी आंतरिक टिप्पणी या आपत्ति को आयोग के अंतिम संस्थागत निर्णय के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
सीएम धामी ने कहा कि 24 जून 2025 को जारी SIR का मूल आदेश पूरे चुनाव आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था। इसके बाद विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए SIR की समय-सारिणी को भी आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग की पूर्ण बैठक के बाद जारी आधिकारिक नोट को पूरे आयोग की स्वीकृति प्राप्त है। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम आदेश सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछे जाने चाहिए, लेकिन किसी इंटरनल नोट को अंतिम फैसला या किसी आपत्ति को संस्थागत मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि तथ्यों का निर्धारण केवल किसी खबर की हेडलाइन से नहीं, बल्कि पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, Form-6, गैर-SIR अवधि में इस्तेमाल होने वाले सामान्य फॉर्म और मतदाताओं से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।
उन्होंने कहा कि unmapped अथवा logical discrepancy वाले मतदाताओं के दस्तावेज BLO द्वारा घर जाकर प्राप्त किए जाएंगे। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क तथा विशेष शिविर लगाए जाने की व्यवस्था की गई है।
सीएम धामी ने बताया कि ECINet को लेकर उठे सवालों पर स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की व्यवस्था की गई है। इसके लिए सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी, जिसमें IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले सर्कुलेट करने और बैठकों के मिनट्स जारी करने का निर्णय लिया गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी जमीन को नियमों के विरुद्ध बेचे जाने के कांग्रेस के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास ऐसे मामलों से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल आरोप दोहराने से वह तथ्य नहीं बन जाता।
नकल माफिया को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। धामी ने कहा कि प्रदेश में नकल के मामलों में लगातार कार्रवाई हुई है और सरकार के अनुसार 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा और मर्यादा बनाए रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तियों और दिवंगत लोगों को लेकर सार्वजनिक विमर्श में सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।
SIR के अंतिम आदेश सर्वसम्मति से लिए जाने की बात।
24 जून 2025 के मूल SIR आदेश को सर्वसम्मति से जारी किए जाने का दावा।
ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की व्यवस्था।
BLO के माध्यम से कुछ मतदाताओं के दस्तावेज घर से लेने की व्यवस्था।
छूटे और पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए विशेष अभियान की बात।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से आरोपों के समर्थन में तथ्य और प्रमाण सार्वजनिक करने को कहा।
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