नई दिल्ली। केंद्र सरकार की बागवानी क्षेत्र से जुड़ी सब्सिडी योजनाओं को लेकर किसानों, कारोबारियों और नई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने अपनी दो प्रमुख योजनाओं के तहत नए ग्रांट ऑफ क्लीयरेंस (Grant of Clearance- GoC) आवेदन फिलहाल स्वीकार करना रोक दिया है। नए आवेदन पर यह अस्थायी रोक 4 सितंबर 2026 से एक महीने के लिए लागू की गई है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है और देश में व्यावसायिक बागवानी तथा बागवानी उत्पादों के भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बोर्ड की ओर से जिन दो योजनाओं के नए आवेदनों को फिलहाल रोका गया है, उनमें व्यावसायिक बागवानी विकास योजना और कोल्ड स्टोरेज के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी योजना शामिल हैं।
नए GoC आवेदन पर रोक लगाने के पीछे मुख्य उद्देश्य योजनाओं के दिशा-निर्देशों में किए गए संशोधनों को लागू करना, लंबित मामलों की समीक्षा करना और आवेदन की ऑनलाइन व्यवस्था में जरूरी बदलाव करना बताया गया है।
इस दौरान बोर्ड योजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है। नियमों में किए गए बदलावों के बाद आवेदन प्रणाली को नए प्रावधानों के अनुरूप अपडेट किया जा रहा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि केंद्र सरकार ने इन योजनाओं को खत्म कर दिया है। दोनों योजनाएं जारी हैं और नए आवेदन पर रोक केवल अस्थायी है।
जिन किसानों, कंपनियों या अन्य पात्र आवेदकों ने रोक लगने से पहले अपना आवेदन जमा कर दिया है, उनके लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। पहले से जमा आवेदनों को इस अस्थायी रोक के दायरे में नहीं रखा गया है।
ऐसे आवेदनों की जांच और आगे की प्रक्रिया संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी। इसलिए जिन लोगों ने पहले ही आवेदन कर दिया है, उन्हें नए आवेदन की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, संबंधित आवेदकों को अपने आवेदन की स्थिति और बोर्ड की ओर से मांगे जाने वाले अतिरिक्त दस्तावेजों पर नजर रखनी चाहिए।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की इन योजनाओं से जुड़े नियमों में 21 अगस्त 2026 से संशोधन किया गया है। नए प्रावधानों के जरिए योजना की पात्रता और लाभार्थियों से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट किया गया है।
संशोधित नियमों में कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और कुछ सरकारी पदाधिकारियों को योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता के दायरे से बाहर किया गया है।
इसके साथ ही परिवार की परिभाषा को भी विस्तृत किया गया है। अब पात्रता की जांच के दौरान आवेदक के पति या पत्नी के साथ-साथ माता-पिता, बेटे और बेटियों को भी परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है।
इस बदलाव का उद्देश्य एक ही परिवार से जुड़े अलग-अलग लोगों के नाम पर योजना का लाभ लेने की संभावनाओं को नियंत्रित करना और सरकारी सहायता को वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की व्यावसायिक बागवानी विकास योजना का उद्देश्य देश में बड़े स्तर पर बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही फसल की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक सुविधाओं को विकसित करना भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फल, सब्जियों और फूलों सहित विभिन्न बागवानी गतिविधियों से जुड़ी पात्र परियोजनाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता प्रदान की जाती है।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर उत्पादन और पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं के विकास से किसानों और बागवानी क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को अपनी परियोजनाओं को व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
बागवानी उत्पादों में फल और सब्जियां सबसे अधिक जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज में शामिल हैं। अगर इन उत्पादों के लिए पर्याप्त भंडारण व्यवस्था उपलब्ध नहीं होती है तो किसानों को जल्दबाजी में अपनी उपज बेचनी पड़ सकती है।
इसी समस्या को कम करने के लिए कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक भंडारण सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी योजना के तहत पात्र परियोजनाओं में कोल्ड स्टोरेज और बागवानी उत्पादों के भंडारण से जुड़ी सुविधाओं के निर्माण, विस्तार और आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन दिया जाता है।
इस तरह की सुविधाओं से किसानों की उपज को अधिक समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है और बाजार में बेहतर अवसर मिलने पर उसे बेचने की संभावना बढ़ती है।
जो किसान, उद्यमी या संस्थान इन योजनाओं के तहत नई परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, उन्हें फिलहाल नए GoC आवेदन शुरू होने तक इंतजार करना होगा।
हालांकि, इस अवधि का इस्तेमाल परियोजना की तैयारी पूरी करने में किया जा सकता है। जमीन से जुड़े दस्तावेज, परियोजना रिपोर्ट, वित्तीय व्यवस्था, बैंक से संबंधित कागजात और अन्य जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद समय बच सकता है।
आवेदन दोबारा शुरू होने के बाद नए नियमों और संशोधित पात्रता शर्तों के आधार पर आवेदन करना होगा।
फिलहाल नए GoC आवेदन पर एक महीने के लिए रोक लगाई गई है। इस अवधि में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की ओर से योजना के नियमों और ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को अपडेट करने का काम किया जा रहा है।
रोक की अवधि समाप्त होने के बाद बोर्ड की ओर से आगे की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी जारी की जाएगी। इसके बाद पात्र आवेदक संशोधित नियमों के अनुसार नए आवेदन कर सकेंगे।
इसलिए किसानों और बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए जरूरी है कि वे आवेदन दोबारा शुरू होने से पहले योजना की नई पात्रता शर्तों और दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इन योजनाओं को बंद नहीं किया है। केवल नए Grant of Clearance आवेदन अस्थायी रूप से रोके गए हैं।
पहले से जमा आवेदनों की प्रक्रिया जारी रहेगी और नई परियोजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया भी संशोधित नियमों के साथ दोबारा शुरू की जाएगी।
इसलिए अगर कोई किसान या उद्यमी इन योजनाओं के तहत सब्सिडी का लाभ लेने की तैयारी कर रहा है तो उसे फिलहाल आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के बजाय जरूरी दस्तावेज और परियोजना की तैयारी पूरी रखनी चाहिए।
भारत में फल, सब्जी, फूल और अन्य बागवानी उत्पादों का उत्पादन बड़ी संख्या में किसान करते हैं। लेकिन उत्पादन के बाद भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण की पर्याप्त सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सरकारी सब्सिडी और सहायता योजनाओं का उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देना है। कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं के विस्तार से कृषि उपज के नुकसान को कम करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
ऐसे में नियमों में बदलाव और आवेदन प्रक्रिया की समीक्षा को बागवानी क्षेत्र में सरकारी सहायता को अधिक व्यवस्थित और लक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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