देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मंत्री द्वारा पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर पलटवार किया है। उन्होंने रेखा आर्य पर 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
गिरधारी लाल साहू ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में मंत्री रेखा आर्य की ओर से सामने लाए गए कथित ऑडियो को फर्जी बताते हुए दावा किया कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑडियो के जरिए उन्हें बदनाम करने और पारिवारिक विवाद को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने मंत्री से एफआईआर वापस लेने की मांग भी की। साहू ने अपने वीडियो में राजनीतिक जीवन में रेखा आर्य के उत्थान में अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जनता से न्याय की अपील की।
इससे पहले महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में उन्होंने मारपीट, धोखाधड़ी, जातिसूचक अपमान, धमकी, दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति ने विवाह के समय अपनी पूर्व शादी की जानकारी छिपाई थी।
रेखा आर्य ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं; इनकी सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
मंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए कथित ऑडियो में एक पुरुष और महिला के बीच बातचीत सुनाई देने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत में जमानत, दस्तखत और जेल जाने से संबंधित बातें शामिल हैं।
रेखा आर्य ने इस रिकॉर्डिंग को अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया है, जबकि उनके पति ने इसे फर्जी और AI से तैयार बताया है। फिलहाल रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उसमें कही गई बातों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
गिरधारी लाल साहू ने अपने वीडियो में दावा किया कि रेखा आर्य के पास 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है और इसकी किसी भी जांच एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। यह आरोप भी फिलहाल अपुष्ट है।
मामले के सामने आने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। एक ओर मंत्री की शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी ओर उनके पति ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर जवाबी हमला किया है।
मामले में अब पुलिस जांच, कथित ऑडियो-वीडियो की प्रामाणिकता और दोनों पक्षों के आरोपों पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, मंत्री पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होती है या नहीं, इस पर भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर नजर बनी हुई है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के आरोपों को जांच के निष्कर्ष से अलग देखना जरूरी है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और संबंधित साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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