देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के ऐलान के साथ ही उत्तराखंड भाजपा में भी बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। राष्ट्रीय टीम में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम नहीं होने के बाद उनके उत्तराखंड से हटने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि चुनावी साल में प्रदेश भाजपा को जल्द ही नया प्रभारी मिल सकता है।
सोमवार को घोषित राष्ट्रीय टीम में उत्तराखंड से पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी मिली है।
बलूनी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बने रहने से उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों को भाजपा के केंद्रीय मीडिया तंत्र में पहले की तरह प्रमुखता मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य के राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े कई मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से उठाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई टीम में उत्तराखंड से महेंद्र पांडेय को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी और आलोक भट्ट को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, अब तक राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष की भूमिका निभा रहे राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का नाम नई सूची में शामिल नहीं है।
नितिन नवीन की टीम में आठ नए राष्ट्रीय महामंत्रियों की सूची जारी होने के बाद दुष्यंत गौतम का नाम नहीं होना उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इसी के साथ यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व अब उत्तराखंड के लिए नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त कर सकता है।
दुष्यंत गौतम के उत्तराखंड प्रभारी रहते प्रदेश संगठन को लेकर कई राजनीतिक विवाद भी सामने आए। हालांकि, उनके कार्यकाल में सामने आए विभिन्न आरोपों और विवादों को लेकर पार्टी या जांच एजेंसियों के निष्कर्षों को अलग-अलग स्तर पर देखा जाना जरूरी है।
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के संदर्भ में कथित वीआईपी को लेकर लंबे समय से राजनीतिक विवाद बना हुआ है। इस मामले में विभिन्न राजनीतिक व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक चर्चाओं और आरोपों में सामने आते रहे हैं।
कुछ लोगों की ओर से दुष्यंत गौतम और पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार का नाम भी कथित तौर पर लिया गया था। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम आरोप या सार्वजनिक बयान में सामने आना अपने आप में अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष ही निर्णायक माने जाएंगे।
इसी प्रकरण को लेकर पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर से जुड़े कथित मोबाइल टॉक और चैट भी चर्चा में आए थे। राठौर ने बाद में कथित तौर पर इन नामों का उल्लेख नशे अथवा नींद की स्थिति में किए जाने की बात कही थी।
कथित वीआईपी को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच मामले की जांच को लेकर भी लगातार मांग उठती रही। एसआईटी के बाद सीबीआई जांच की मांग ने इस मुद्दे को प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक जिंदा रखा।
भाजपा नेतृत्व इससे पहले पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार को उत्तराखंड से हटाकर राजस्थान की जिम्मेदारी दे चुका है। उनके राजस्थान जाने के बाद से ही दुष्यंत गौतम के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि चुनावी साल में कथित वीआईपी प्रकरण को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों के हमलों से भाजपा को राजनीतिक नुकसान की आशंका है। हालांकि, इन राजनीतिक आकलनों की आधिकारिक पुष्टि भाजपा नेतृत्व की ओर से नहीं की गई है।
दुष्यंत गौतम को लेकर संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की चर्चाएं उस समय और तेज हुईं, जब प्रदेश में उनके पोस्टरों और होर्डिंग्स को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं सामने आईं। इसके बावजूद भाजपा ने तत्काल कोई औपचारिक घोषणा नहीं की और राष्ट्रीय टीम के गठन तक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया।
अब राष्ट्रीय महामंत्री की सूची में गौतम का नाम नहीं होने के बाद उनके उत्तराखंड प्रभारी पद से हटने की संभावनाएं काफी मजबूत मानी जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा नए प्रदेश प्रभारी के साथ-साथ चुनाव प्रभारी के नाम पर भी फैसला कर सकती है।
राष्ट्रीय टीम में तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना भी उत्तराखंड भाजपा के लिहाज से महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पौड़ी गढ़वाल से टिकट नहीं मिलने के बाद तीरथ सिंह रावत सक्रिय केंद्रीय भूमिका से अपेक्षाकृत दूर नजर आ रहे थे।
अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने उन्हें एक बार फिर संगठन की मुख्यधारा में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। इसे उत्तराखंड भाजपा के भीतर राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
वहीं, वर्ष 2024 में हरिद्वार से पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की जगह त्रिवेंद्र सिंह रावत को लोकसभा चुनाव में उतारा गया था। इसके बाद से निशंक को भी पार्टी संगठन में कोई बड़ी नई जिम्मेदारी नहीं मिली है।
ऐसे में नितिन नवीन की नई टीम के ऐलान ने उत्तराखंड भाजपा में आने वाले दिनों के संभावित फेरबदल की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी उत्तराखंड के लिए नया प्रभारी और चुनाव प्रभारी किसे बनाती है और चुनावी साल में संगठन की कमान किस रणनीति के साथ आगे बढ़ाई जाती है।
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित कथित आरोपों और राजनीतिक चर्चाओं को आरोप/दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता का निष्कर्ष केवल सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय के प्रमाणित निष्कर्षों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
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