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आज श्राद्ध का अंतिम दिन, सर्वपितृ अमावस्या

आज श्राद्ध का अंतिम दिन है. इस दिन को सर्वपितृ अमावस्या,आश्विन अमावस्या, बड़मावस और दर्श अमावस्या भी कहा जाता है. सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिन लोगों की मृत्यु की तिथि पता नहीं होती है. इसके अलावा जिनकी मृत्यु अमावस्या को होती है उनका श्राद्ध भी सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है. सर्वपितृ अमावस्या को बहुत ही विशेष दिन माना गया है. 

सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों को शांति देने के लिए और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ अवश्य ही करें. साथ ही उसका पूरा फल पितरों को समर्पित करें. शास्त्रों के अनुसार पीपल की सेवा और पूजा करने से हमारे पितृ प्रसन्न रहते हैं. इस दिन स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले तिल, शहद और जौ मिला लें. इसके साथ कोई भी सफेद मिठाई, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ लेकर पीपल वृक्ष के नीचे जाकर सर्व प्रथम लोटे की समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित कर दें. ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः मंत्र का लगातार जाप करते रहें.

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